मैनेजमेंट मंत्रा:जैक ऑफ ऑल मत बनिए, ऐसी टीम बनाइए जो हर काम करने में माहिर हो…डेल, पिक्सर जैसी कंपनियों से सबक सीखिए


अमेरिका के बड़े उद्योगपतियों में से एक हेनरी फोर्ड ने एक दफा कहा था- एक साथ आना एक शुरुआत, साथ रहना एक प्रगति और एक साथ काम करना एक सफलता है। जैसे-जैसे कंपनियां बड़ी होती जाती हैं, चुनौतियां भी बढ़ती जाती हैं। ऐसे में किसी कंपनी में अकेले जैक ऑफ ऑल बनने के बजाय हमें एक मास्टर टीम तैयार कर और उसे जैक ऑफ ऑल ट्रेड बनाना चाहिए। ताकि कंपनी के बड़े होते ही एक ऐसा वर्क फोर्स तैयार हो, जो बेहतरीन टीम वर्क और कोलैबरेशन के साथ हर काम को समय पर खत्म कर सकें।

आज मैनेजमेंट मंत्रा में जानिए टीम वर्क के बारे में…साथ ही पढ़िए कैसे डेल, पिक्सर जैसी बड़ी कंपनियां टीम वर्क से सफलता तक पहुंची हैं।

क्या है टीम वर्क...

टीम वर्क में एक ही लक्ष्य के लिए हर सदस्य मेहनत करता है। टीम के सदस्यों को एक खास काम सौंपा जाता है और निर्धारित समय तक उसके पूरा होने की उम्मीद की जाती है। कर्मचारियों का असरदार तरीके से एक साथ काम करने की काबिलियत होना, लीडर के साथ सामंजस्य बना पाना और काम की कदर करना ही टीम वर्क है। ऑफिस में इस तरह की स्किल्स के होने से माहौल अच्छा रहता है, आपसी समझ और दोस्ती रहती है, साथ ही काम की क्वालिटी और क्वांटिटी में भी बढ़ोतरी होती है।

टीम वर्क बढ़ाना है तो इन खूबियों पर काम करिए

1. एक अच्छा लिसनर होना सबसे जरूरी यानी सुनना सीखिए

लोग क्या बोलते हैं उसे ध्यान से सुनें। चाहे वो फीडबैक हो, रिपोर्ट हो, राय हो या शिकायत हो। इस तरह सहकर्मी सहज रहते हैं और गलतफहमियों की गुंजाइश भी कम हो जाती है। साथ ही दूसरों की राय और सकारात्मक आलोचना लेने के लिए हमेशा तैयार रहना।

2. अपनी कंपनी में विश्वसनीय बने रहिए

आपकी टीम को महसूस होना चाहिए कि वो आप पर और आपके काम के प्रति जिम्मेदारी पर विश्वास कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आपको अपने काम समय पर पूरे करने होंगे और डेडलाइन पर ध्यान देना होगा। लोगों को भरोसा दिलाना होगा कि वो आप पर भरोसा कर सकते हैं।

3. समस्याएं तो आएंगी ही…पॉजिटिव बने रहिए

टीम के साथ काम करते हुए सकारात्मक सोच अपनाना और उत्साह बनाकर रखना जरूरी है। अलग-अलग तरह के मिजाज के लोगों के साथ काम करना और उन्हें प्रोत्साहित करना। इसके साथ ही टीम के आपसी विवादों को बेहतर तरीके से संभालना और न्यायसंगत निर्णय लेना। इससे प्रोफेशनल माहौल बना रहता है और काम भी गतिशील रहता है।

टीम में आपसी सहयोग कैसे बढ़ाएं

1. बेहतर कम्युनिकेशन : दूसरों के साथ काम करते हुए आपको अपनी जरूरतों का, ताकत का और प्रोजेक्ट में अपने रोल का पता होना चाहिए।

2. उद्देश्य : काम में आपसी सहयोग बहुत हद तक निर्भर करता है उत्साह पर। काम के उद्देश्य और लक्ष्य को ध्यान में रखें और परफॉर्मेंस सुधार के लिए इनका ईंधन की तरह इस्तेमाल करें।

3. डेटा मैनेजमेंट : किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसे व्यवस्थित रखें और अपने साथियों के साथ शेयर भी करें।

4. स्वीकार्यता : योगदान, फीडबैक, नए विचार और सलाह और काम में सुधार के लिए हमेशा तैयार रहें। इसी तरह ध्यान रखें कि सफलता हर सदस्य की मेहनत से मिलती है। टीम की हर जीत का श्रेय सभी सदस्यों को दें।

तीन बड़ी कंपनियों से सीख सकते हैं टीम वर्क

1. डेल : रिमोट वर्किंग करते हुए बताया- दूर रहकर भी टीम बॉन्डिंग संभव है

रिमोट वर्क की सच्चाई को अपनाते हुए बहुत सी कंपनियों को वर्चुअल वर्कस्पेस कॉनसेप्ट के साथ काफी संघर्ष करना पड़ा। इस बीच टीम वर्क कल्चर को नुकसान पहुंचाए बिना डेल ने एक कनेक्टेड वर्क प्लेस प्रोग्राम तैयार किया। इस सिस्टम में सभी योग्य टीम मेंबर्स को उनकी सुविधा, पसंदीदा शैली और व्यक्तिगत जीवन की जरूरतों के अनुसार काम करने की छूट दी गई। साथ ही वो कब और कहां से काम करना चाहते हैं ये भी उन्हीं पर छोड़ा गया। इसके बावजूद टीम आपस में इस तरह कनेक्टेड रहती है जैसे कि एक साथ एक ऑफिस में काम करती हो। डेल ने यह साबित किया कि दूरी के बावजूद टीम बॉन्डिंग संभव है।

2. टारगेट: साढ़े तीन लाख लोगों की बात सुनती है

3,50,000 कर्मचारियों के साथ भी टारगेट हर कर्मचारी की आवाज सुनता है। कंपनी में ऐसे शोध होते हैं जिसमें टीम मेंबर्स अपना ईमानदार फीडबैक दे सकते हैं। साथ ही प्रोडक्ट्स और सर्विस के लिए आइडिया भी दे सकते हैं। एचआर हेड इन्हें व्यक्तिगत रूप से पढ़ते हैं और विचार करते हैं। यह तरीका तब बेहद सफल होता है जब कर्मचारियों से खास विचार शेयर करवाए जाते हैं। यह बताता है कि हर किसी के विचारों को जानना और उन्हें सुनना किस हद तक असरदार हो सकता है।

3. पिक्सर : लोग एक साथ एक जगह बैठकर काम करते हैं

शुरुआत में स्टीव जॉब्स को कंपनी एक ऐसी फैक्ट्री में रीलोकेट करनी पड़ी थी। जिसे तीन हिस्सों में विभाजित किया जाना था और सभी में अलग-अलग ऑफिस निकालने थे। लेकिन जॉब्स ने तय किया कि वो एक ही खुली जगह रखेंगे जिसके बीच में एक एट्रियम होगा। जॉब्स चाहते थे कि एक ही छत के नीचे अलग-अलग क्षेत्र, विचार के लोग एक साथ काम करें, टीम वर्क और कोलैबरेशन में काम करें। स्टीव जॉब्स अलग ऑफिस को डिजाइन प्रॉब्लम मानते थे। वो मानते थे कि जब लोग एक साथ एक जगह बैठकर काम करते हैं तो क्रिएटिविटी पूरे उफान पर होती है।

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